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{{Heading| | {{Heading|‘सौन्दरनन्दम्’ અને ‘लहरों के राजहंस’|રાજેશ્વરી પટેલ}} | ||
{{Block center|'''<poem>तं गौरवं बुद्धगतं चकर्ष भार्यानुराग: पुनराचकर्ष । | {{Block center|'''<poem>तं गौरवं बुद्धगतं चकर्ष भार्यानुराग: पुनराचकर्ष । | ||
सोडनिश्चयान्नापिययौ न तस्थौ तरंस्तरंगेष्विव राजहंस:।। | सोडनिश्चयान्नापिययौ न तस्थौ तरंस्तरंगेष्विव राजहंस:।। | ||